श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.16.5 
ঠাকুর পণ্ডিত আদি কেহ নাহি জানে
ডোল মুডিঽ দিযা আছে ঘরে এক কোণে
ठाकुर पण्डित आदि केह नाहि जाने
डोल मुडिऽ दिया आछे घरे एक कोणे
 
 
अनुवाद
श्रीवास पंडित सहित किसी को भी इस बारे में पता नहीं था। वह कमरे के एक कोने में अनाज की टोकरी के पीछे छिप गई।
 
No one, including Srivasa Pandit, knew about this. She hid behind a basket of grain in a corner of the room.
तात्पर्य
डोला शब्द अनाज के भंडारण के लिए एक बड़ी टोकरी को संदर्भित करता है। मुड़ी शब्द का अर्थ "ढंका हुआ" या "छिपा हुआ" होता है। वह अनाज की टोकरी के पीछे खुद को छिपाती थी।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)