श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  2.16.49 
অতএব অদ্বৈত—সবার অগ্রগণ্য
সকল বৈষ্ণব বলে,—ঽঅদ্বৈত সে ধন্যঽ
अतएव अद्वैत—सबार अग्रगण्य
सकल वैष्णव बले,—ऽअद्वैत से धन्यऽ
 
 
अनुवाद
इसलिए अद्वैत सबसे श्रेष्ठ है। सभी वैष्णवों ने घोषणा की, "अद्वैत वास्तव में गौरवशाली है।"
 
Therefore Advaita is the most excellent. All Vaishnavas declare, "Advaita is truly glorious."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)