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श्लोक 2.16.41  |
ঽগুরুঽ বুদ্ধি অদ্বৈতেরে করে নিরন্তর
এতেকে অদ্বৈত দুঃখ পায বহুতর |
ऽगुरुऽ बुद्धि अद्वैतेरे करे निरन्तर
एतेके अद्वैत दुःख पाय बहुतर |
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| अनुवाद |
| भगवान अद्वैत को सदैव अपने गुरु के रूप में सम्मान देते थे। इससे अद्वैत अत्यंत दुखी हुआ। |
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| The Lord always respected Advaita as his guru. This made Advaita very sad. |
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