श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  2.16.35 
কৃষ্ণ মোর প্রাণ-ধন, কৃষ্ণ মোর ধর্ম
তোমরা মোহার ভাই-বন্ধু জন্ম জন্ম
कृष्ण मोर प्राण-धन, कृष्ण मोर धर्म
तोमरा मोहार भाइ-बन्धु जन्म जन्म
 
 
अनुवाद
"कृष्ण मेरे प्राण और धन हैं, कृष्ण मेरे धर्म हैं। तुम सब जन्म-जन्मान्तर से मेरे भाई और मित्र हो।
 
"Krishna is my life and wealth, Krishna is my religion. You all are my brothers and friends from birth to birth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)