“किछु नि चाञ्चल्य मुञि उपाधिक
करोङ्बलिह मोहारे, येन सेइ-क्षणे मरोङ्
अनुवाद
“यदि मैं कभी कोई शरारत करूँ तो कृपया मुझे सूचित करें ताकि मैं तुरंत मर जाऊँ।
“If I ever do anything mischievous, please inform me so that I die immediately.
तात्पर्य
जब श्रीमान् महाप्रभु का आनंदमय भावपरायणता समाप्त हो जाती, तब वे भक्तों से पूछते थे, "क्या मैंने अपने शरीर या मन से कोई शरारत की है? यदि मैंने की है, तो मैं उस पल क्यों नहीं मर गया?" महाप्रभु की भगवती भावप्रदर्शनी में, प्रायः वे अपने कमल के चरण भक्तों के सिर पर रखते थे और अद्वैताचार्य जी को अपना नौकर समझते थे। अगले पल, एक भक्त के भावों को ग्रहण करके वे स्वयं ही अपनी विनम्रता का प्रदर्शन करके भक्तों के लिए एक मिसाल पेश करते थे। वैष्णवों ने उन्हें इन विषयों के बारे में बताया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥