श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.16.31 
দশনে ধরিযা তৃণ করযে ক্রন্দন
“কৃষ্ণ রে, বাপ রে, তুই মোহার জীবন”
दशने धरिया तृण करये क्रन्दन
“कृष्ण रे, बाप रे, तुइ मोहार जीवन”
 
 
अनुवाद
अपने दांतों के बीच एक तिनका लेकर, वह रोते हुए कहते, "हे प्रिय कृष्ण, आप मेरे जीवन और आत्मा हैं।"
 
Taking a straw between his teeth, he would cry out, "O dear Krishna, you are my life and soul."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)