जब भगवान ने कहा, "अब मैं हृदय में आनंद का अनुभव कर रहा हूँ," श्रीवास पंडित मुस्कुराये और कीर्तन में शामिल हो गये।
When the Lord said, “Now I am experiencing joy in my heart,” Srivasa Pandita smiled and joined in the kirtan.
तात्पर्य
सांसारिक लोगों के संग से परम ऊँचा प्रेम-भाव की प्राप्ति की बिलकुल संभावना नहीं रहती। किंतु केवल भौतिक लोगों को हटा देने भर से ही कृष्ण-भक्ति में रुझान अधिक नहीं बढ़ता। भक्ति में रुझान उस समय अपने आप बढ़ता है जब समान प्रवृत्ति तथा एक ही रुचि के लोगों के संगति का प्रभाव पड़ता है। सांसारिक लोगों के संग में ईश्वर-प्रेम का ऐसा विकास नहीं होता। श्रीपाद महाप्रभु की उदासी को दूर होता देखकर श्रीवास पंडित आनंद से कीर्तन करने लगे। भगवान् के भक्तों के मुखड़े में भी आनंद के भाव प्रकट होने लगे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥