श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.16.17 
বিশেষে প্রভুর বাক্যে কম্পিত শরীর
আজ্ঞা দিযা চুলে ধরিঽ করিলা বাহির
विशेषे प्रभुर वाक्ये कम्पित शरीर
आज्ञा दिया चुले धरिऽ करिला बाहिर
 
 
अनुवाद
प्रभु के वचनों से उसका शरीर काँप उठा। उसने आदेश दिया कि उसके बाल पकड़कर उसे बाहर फेंक दिया जाए।
 
The Lord's words sent shivers down her spine. He ordered her to be grabbed by the hair and thrown out.
तात्पर्य
जब भी उनके इंद्रिय-सुख में कोई बाधा आती, तो सामान्य लोग क्रोध से काँप जाया करते थे, किन्तु श्रीवास ऐसे झूठे अहंकार से प्रेरित न थे; उन्होंने महाप्रभु की चिंता की वजह से क्रोध के कारण बेचैनी दिखाई। इन्होंने दूसरों को निर्देश दिया कि उनकी छिपी हुई, सम्मानित सास को बालों से पकड़कर खींचकर अनाज की टोकरी के पीछे से बाहर निकाला जाए, और अन्य लोगों की निगाहों से बचाकर बाहर ले जाया जाए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)