श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 151
 
 
श्लोक  2.16.151 
শুক্লাম্বর-তণ্ডুল-ভোজন যেই শুনে
সেই প্রেম-ভক্তি পায চৈতন্য-চরণে
शुक्लाम्बर-तण्डुल-भोजन येइ शुने
सेइ प्रेम-भक्ति पाय चैतन्य-चरणे
 
 
अनुवाद
जो यह सुनता है कि भगवान ने शुक्लम्बर के चावल किस प्रकार खाये, वह भगवान चैतन्य के चरणों में अनन्य भक्ति प्राप्त करता है।
 
One who hears how the Lord ate the rice of Shuklambara attains exclusive devotion at the feet of Lord Chaitanya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)