श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 146
 
 
श्लोक  2.16.146 
মুদ্রা নাহি করে বিপ্র, না দিল আপনে
তথাপি তণ্ডুল প্রভু খাইল যতনে
मुद्रा नाहि करे विप्र, ना दिल आपने
तथापि तण्डुल प्रभु खाइल यतने
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण ने चावल को मुद्राओं के साथ अर्पित नहीं किया, न ही उसे अर्पित किया, फिर भी भगवान ने उत्सुकता से उसे खा लिया।
 
The Brahmin did not offer the rice with coins, nor did he offer it, yet the Lord eagerly ate it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)