श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 142
 
 
श्लोक  2.16.142 
বিনে সেই বিধি কিছু স্বীকার না করে
সকল প্রতিজ্ঞা চূর্ণ ভক্তের দুযারে
विने सेइ विधि किछु स्वीकार ना करे
सकल प्रतिज्ञा चूर्ण भक्तेर दुयारे
 
 
अनुवाद
वे तब तक कोई वस्तु स्वीकार नहीं करते जब तक कि वह उन नियमों के अनुसार अर्पित न की जाए। परन्तु अपने भक्तों के लिए वे उन सभी आदेशों को तोड़ देते हैं।
 
He does not accept anything unless it is offered according to these rules. But for the sake of his devotees, he breaks all these orders.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)