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श्लोक 2.16.14  |
আমরাই কোন বা করিল অপরাধ
অতএব প্রভু চিত্তে না পায প্রসাদ” |
आमराइ कोन वा करिल अपराध
अतएव प्रभु चित्ते ना पाय प्रसाद” |
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| अनुवाद |
| “हमने अवश्य ही कोई अपराध किया होगा, इसलिए भगवान् को कोई प्रसन्नता नहीं हो रही है।” |
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| “We must have committed some crime, that is why God is not happy.” |
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