श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.16.14 
আমরাই কোন বা করিল অপরাধ
অতএব প্রভু চিত্তে না পায প্রসাদ”
आमराइ कोन वा करिल अपराध
अतएव प्रभु चित्ते ना पाय प्रसाद”
 
 
अनुवाद
“हमने अवश्य ही कोई अपराध किया होगा, इसलिए भगवान् को कोई प्रसन्नता नहीं हो रही है।”
 
“We must have committed some crime, that is why God is not happy.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)