vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना
»
श्लोक 138
श्लोक
2.16.138
শুক্লাম্বরের বর শুনিঽ বৈষ্ণব-মণ্ডল
জয জয হরি-ধ্বনি করিল সকল
शुक्लाम्बरेर वर शुनिऽ वैष्णव-मण्डल
जय जय हरि-ध्वनि करिल सकल
अनुवाद
शुक्लम्बर का आशीर्वाद सुनकर सभी वैष्णवों ने "जय! जय! हरि! हरि!" का जाप किया।
Hearing the blessings of Shuklamber, all the Vaishnavas chanted "Jai! Jai! Hari! Hari!"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×