श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 138
 
 
श्लोक  2.16.138 
শুক্লাম্বরের বর শুনিঽ বৈষ্ণব-মণ্ডল
জয জয হরি-ধ্বনি করিল সকল
शुक्लाम्बरेर वर शुनिऽ वैष्णव-मण्डल
जय जय हरि-ध्वनि करिल सकल
 
 
अनुवाद
शुक्लम्बर का आशीर्वाद सुनकर सभी वैष्णवों ने "जय! जय! हरि! हरि!" का जाप किया।
 
Hearing the blessings of Shuklamber, all the Vaishnavas chanted "Jai! Jai! Hari! Hari!"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)