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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना
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श्लोक 136
श्लोक
2.16.136
প্রেম-ভক্তি বিলাইতে মোর অবতার
জন্ম জন্ম তুমি প্রেম-সেবক আমার
प्रेम-भक्ति विलाइते मोर अवतार
जन्म जन्म तुमि प्रेम-सेवक आमार
अनुवाद
"मैंने प्रेम-भक्ति बाँटने के लिए अवतार लिया है। तुम जन्म-जन्मान्तर से मेरे प्रिय सेवक हो।
"I have incarnated to share love and devotion. You have been my beloved servant from birth to birth.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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