श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 133
 
 
श्लोक  2.16.133 
গডাগডি যাযেন সুকৃতি শুক্লাম্বর
তণ্ডুল খাযেন সুখে বৈকুণ্ঠ ঈশ্বর
गडागडि यायेन सुकृति शुक्लाम्बर
तण्डुल खायेन सुखे वैकुण्ठ ईश्वर
 
 
अनुवाद
वैकुण्ठ के भगवान ने प्रसन्नतापूर्वक वह चावल खाया तो धर्मात्मा शुक्लम्बर भूमि पर लोटने लगे।
 
When the Lord of Vaikuntha happily ate that rice, the virtuous Shuklamber started rolling on the ground.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)