श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 132
 
 
श्लोक  2.16.132 
দন্তে তৃণ করে কেহ, কেহ নমস্করে
কেহ বলে,—“প্রভু কভু না ছাডিবা মোরে”
दन्ते तृण करे केह, केह नमस्करे
केह बले,—“प्रभु कभु ना छाडिबा मोरे”
 
 
अनुवाद
किसी ने अपने दांतों के बीच पुआल रखा, किसी ने प्रणाम किया, और किसी ने कहा, “हे प्रभु, मुझे कभी मत छोड़ो।”
 
Some held a straw between their teeth, some bowed down, and some said, “O Lord, never leave me.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)