श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 130
 
 
श्लोक  2.16.130 
না জানি, কে কোন্ দিগে পডযে কান্দিযাস
বেই বিহ্বল হৈলা কারুণ্য দেখিযা
ना जानि, के कोन् दिगे पडये कान्दियास
बेइ विह्वल हैला कारुण्य देखिया
 
 
अनुवाद
रोते हुए कौन कहाँ गिरा, किसी को पता ही नहीं चला। ऐसी करुणा देखकर हर कोई अभिभूत था।
 
No one knew who fell where, weeping. Everyone was overwhelmed by such compassion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)