श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.16.13 
মহা-ত্রাসে চিন্তে সব ভাগবত-গণ
“আমাঽ-সবাঽ বিনা আর নাহি কোন জন
महा-त्रासे चिन्ते सब भागवत-गण
“आमाऽ-सबाऽ विना आर नाहि कोन जन
 
 
अनुवाद
डर के मारे सभी भक्तों ने सोचा, “हमारे अलावा यहां कोई नहीं है।
 
All the devotees, filled with fear, thought, “There is no one here except us.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)