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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना
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श्लोक 125
श्लोक
2.16.125
এত বলিঽ হস্ত দিযা ঝুলির ভিতর
মুষ্টি মুষ্টি তণ্ডুল চিবায বিশ্বম্ভর
एत बलिऽ हस्त दिया झुलिर भितर
मुष्टि मुष्टि तण्डुल चिवाय विश्वम्भर
अनुवाद
ऐसा कहकर विश्वम्भर ने शुक्लम्बर की भिक्षा-पात्र से मुट्ठी भर कच्चे चावल निकाले और उसे खाने लगे।
Saying this, Vishvambhar took out a handful of raw rice from Shuklambar's alms bowl and started eating it.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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