श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 120
 
 
श्लोक  2.16.120 
বসিযা আছযে প্রভু ঈশ্বর আবেশে
ঝুলি কান্ধে শুক্লাম্বর নাচে কান্দে হাসে
वसिया आछये प्रभु ईश्वर आवेशे
झुलि कान्धे शुक्लाम्बर नाचे कान्दे हासे
 
 
अनुवाद
जैसे ही विश्वम्भर भगवान के भाव में बैठे, शुक्लम्बर अपना थैला कंधे पर रखकर नाचने, रोने और हंसने लगे।
 
As soon as Vishvambhar sat in the posture of God, Shuklambar, keeping his bag on his shoulder, started dancing, crying and laughing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)