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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना
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श्लोक 119
श्लोक
2.16.119
ঝুলি কান্ধে লৈঽ বিপ্র নাচে মহারঙ্গে
দেখিঽ হাসে প্রভু সব-বৈষ্ণবের সঙ্গে
झुलि कान्धे लैऽ विप्र नाचे महारङ्गे
देखिऽ हासे प्रभु सब-वैष्णवेर सङ्गे
अनुवाद
ब्राह्मण को कंधे पर थैला लटकाये आनंद में नाचते देख भगवान और सभी वैष्णव हँस पड़े।
Seeing the Brahmin dancing in joy with a bag hanging on his shoulder, the Lord and all the Vaishnavas laughed.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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