vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना
»
श्लोक 115
श्लोक
2.16.115
কৃষ্ণানন্দ-প্রসাদে দারিদ্র্য নাহি জানে
বলিযা বেডায ঽকৃষ্ণঽ সকল ভবনে
कृष्णानन्द-प्रसादे दारिद्र्य नाहि जाने
बलिया वेडाय ऽकृष्णऽ सकल भवने
अनुवाद
कृष्ण की कृपा पाकर वह आनंदित हो गया, उसे दरिद्रता का पता ही नहीं चला। वह घर-घर घूमते हुए कृष्ण का नाम जपता रहता।
He was filled with joy at Krishna's grace, and poverty was unnoticed. He wandered from house to house, chanting Krishna's name.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×