श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 114
 
 
श्लोक  2.16.114 
ভিক্ষা করিঽ দিবসে যে কিছু বিপ্র পায
কৃষ্ণের নৈবেদ্য করিঽ তবে শেষ খায
भिक्षा करिऽ दिवसे ये किछु विप्र पाय
कृष्णेर नैवेद्य करिऽ तबे शेष खाय
 
 
अनुवाद
दिन में भिक्षा मांगने के बाद ब्राह्मण जो कुछ भी प्राप्त करता था, उसे कृष्ण को अर्पित कर देता था और उनका बचा हुआ भोजन भी स्वीकार कर लेता था।
 
After begging for alms during the day, the Brahmin would offer whatever he got to Krishna and also accept his leftover food.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)