महंत-स्वभाव एइ तारिते पामरा
निजा कार्य नाही tabu याना तारा धारा
"सभी संत लोगों का सामान्य अभ्यास पतितों को मुक्त करना है। इसलिए वे लोगों के घरों में जाते हैं, हालाँकि उनका वहाँ कोई व्यक्तिगत व्यवसाय नहीं होता है।" परिणामस्वरूप, दाता को अज्ञात-सुकृत प्राप्त होता है। केवल वे ही जो इस आध्यात्मिक प्रवृत्ति को समझ सकते हैं, भक्ति सेवा के मंदिर में एक भिखारी का वेश धारण करके और भौतिक वस्तुओं से जुड़े मूर्ख लोगों को पवित्रता प्राप्त करने में मदद करके हरि की पूजा करने में सक्षम हैं। पवित्र ब्राह्मण व्यवहार को स्वीकार करते हुए, भक्ति सेवा के मंदिर में भिखारी भौतिकवादी ब्राह्मण व्यवहार के मंच पर बने रहने से आत्म-धोखे में नहीं पड़ते हैं, बल्कि अपने सभी संचित भिक्षा को कृष्ण की सेवा में लगाते हैं। चूंकि वैष्णव कृष्ण के विरोधी और कर्म के फलों का आनंद लेने के उद्देश्य से इंद्रिय तृप्ति पर आधारित तथाकथित ब्राह्मणवाद में नहीं रहते हैं, वे सब कुछ कृष्ण की सेवा में लगाते हैं और दुनिया के मूर्खों को अपनी विशेषताओं और उच्च स्थिति को समझने की अनुमति नहीं देते हैं।
