श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 112
 
 
श्लोक  2.16.112 
নবদ্বীপে ঘরে ঘরে ঝুলি লৈঽ কান্ধে
ভিক্ষা করিঽ অহর্নিশ ঽকৃষ্ণঽ বলিঽ কান্দে
नवद्वीपे घरे घरे झुलि लैऽ कान्धे
भिक्षा करिऽ अहर्निश ऽकृष्णऽ बलिऽ कान्दे
 
 
अनुवाद
वह कंधे पर थैला लेकर नवद्वीप में घर-घर जाकर भिक्षा मांगता था। वह दिन-रात कृष्ण का नाम जपते हुए रोता रहता था।
 
He went from door to door in Navadvipa, carrying a bag on his shoulder, begging for alms. Day and night, he wept, chanting Krishna's name.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)