श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 107
 
 
श्लोक  2.16.107 
বীরাসন করিযাঠাকুর ক্ষণে বৈসে
মহা-অট্ট-অট্ট করিঽ মাঝে মাঝে হাসে
वीरासन करियाठाकुर क्षणे वैसे
महा-अट्ट-अट्ट करिऽ माझे माझे हासे
 
 
अनुवाद
कभी भगवान् वीरासन मुद्रा में बैठते, तो कभी जोर से हँसते।
 
Sometimes the Lord would sit in Veerasana posture, and sometimes he would laugh loudly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)