श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 106
 
 
श्लोक  2.16.106 
ক্ষণে হাস, ক্ষণে শ্বাস, ক্ষণে বা বিরস
এই-মত প্রভুর আবেশ-পরকাশ
क्षणे हास, क्षणे श्वास, क्षणे वा विरस
एइ-मत प्रभुर आवेश-परकाश
 
 
अनुवाद
कभी वे हँसते, कभी गहरी आह भरते, और कभी उदास हो जाते। इस प्रकार भगवान अपना परमानंद प्रेम प्रकट करते।
 
Sometimes He would laugh, sometimes He would sigh deeply, and sometimes He would become sad. Thus the Lord would express His ecstatic love.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)