श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  2.16.104 
সরস্বতী সহিত আপনে বলরাম
সেই সে ঠাকুর গায পূরিঽ মনস্কাম
सरस्वती सहित आपने बलराम
सेइ से ठाकुर गाय पूरिऽ मनस्काम
 
 
अनुवाद
बलराम और सरस्वती पूर्ण संतुष्टि के साथ उनकी महिमा का गान करते हैं।
 
Balarama and Saraswati sing his glories with complete satisfaction.
तात्पर्य
कृष्ण-कीर्तन करते समय परमानंद में डूबने पर मनुष्य की जबान से जो मधुर ध्वनियाँ निकलती हैं, वे बलदेव और सरस्वती के मिलन से प्रकट होती हैं। बलदेव अपनी जीभ के माध्यम से सरस्वती द्वारा अपने आराध्य भगवान के गुणगान में पूरी तरह से संतुष्ट हो जाते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)