श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 103
 
 
श्लोक  2.16.103 
অশেষ আবেশে নাচে শ্রী-গৌরাঙ্গ রায
তাহা বর্ণিবার শক্তি কে ধরে জিহ্বায?
अशेष आवेशे नाचे श्री-गौराङ्ग राय
ताहा वर्णिबार शक्ति के धरे जिह्वाय?
 
 
अनुवाद
भगवान गौरांग असीम आनंद में नृत्य कर रहे थे। उस नृत्य का वर्णन करने की शक्ति किसमें है?
 
Lord Gauranga was dancing in boundless bliss. Who has the power to describe that dance?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)