श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 100
 
 
श्लोक  2.16.100 
“জয কৃষ্ণ গোপাল গোবিন্দ বনমালী”
অহর্নিশ গায সবে হৈঽ কুতূহলী
“जय कृष्ण गोपाल गोविन्द वनमाली”
अहर्निश गाय सबे हैऽ कुतूहली
 
 
अनुवाद
दिन-रात वे सभी खुशी से गाते थे, “जय कृष्ण, गोपाल, गोविंदा, वनमाली!”
 
Day and night they all sang happily, “Jai Krishna, Gopal, Govinda, Vanmali!”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)