श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 16: भगवान का शुक्लाम्बर के चावल को स्वीकार करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.16.1 
জয জয মহামহেশ্বর গৌরচন্দ্র
জয জয বিশ্বম্ভর-প্রিয ভক্ত-বৃন্দ
जय जय महामहेश्वर गौरचन्द्र
जय जय विश्वम्भर-प्रिय भक्त-वृन्द
 
 
अनुवाद
समस्त प्रभुओं के प्रभु गौरचन्द्र की जय हो! विश्वम्भर और उनके प्रिय भक्तों की जय हो!
 
Victory to Gaurachandra, the Lord of all Lords! Victory to Visvambhara and his beloved devotees!
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)