श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 14: यमराज का संकीर्तन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.14.34 
উঠিল পরমানন্দ দেব-সঙ্কীর্তন
কৃষ্ণের আবেশে নাচে সূর্যের নন্দন
उठिल परमानन्द देव-सङ्कीर्तन
कृष्णेर आवेशे नाचे सूर्येर नन्दन
 
 
अनुवाद
जैसे-जैसे देवताओं के कीर्तन का आनंद बढ़ता गया, सूर्यपुत्र कृष्ण के प्रेम में भावविभोर होकर नृत्य करने लगे।
 
As the joy of the kirtan of the gods increased, the son of Surya started dancing in ecstasy in love of Krishna.
तात्पर्य
वाक्यांश सूर्येर नन्दन यमराज की ओर संकेत करता है, जो सूर्य देव के पुत्र हैं। भौतिक दृष्टि से वह अनियंत्रित और भौतिकवादी व्यक्तियों को पुरस्कार और दंड देते हैं। जैसा कि उन्होंने परमानंद कीर्तन सुना, उन्हें एक देवता के रूप में अपने सांसारिक पद को भूलने का अवसर मिला। इस प्रकार वह भगवान के प्रेम से मदमस्त हो गए और कीर्तन के प्रेमपूर्ण रस में भावनात्मक रूप से नृत्य करने लगे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)