श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 14: यमराज का संकीर्तन  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  2.14.33 
উঠিলেন যমদেব কীর্তন শুনিযা
চৈতন্য পাইযা নাচে মহামত্ত হৈযা
उठिलेन यमदेव कीर्तन शुनिया
चैतन्य पाइया नाचे महामत्त हैया
 
 
अनुवाद
कीर्तन सुनकर यमराज उठ खड़े हुए और जैसे ही उन्हें होश आया, वे नशे में धुत व्यक्ति की तरह नाचने लगे।
 
Hearing the kirtan, Yamraj stood up and as soon as he regained consciousness, he started dancing like a drunk person.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)