श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 14: यमराज का संकीर्तन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  2.14.32 
ঽকৃষ্ণাবেশঽ হেন জানিঽ অজ-পঞ্চানন
কর্ণ-মূলে সবে মিলিঽ করযে কীর্তন
ऽकृष्णावेशऽ हेन जानिऽ अज-पञ्चानन
कर्ण-मूले सबे मिलिऽ करये कीर्तन
 
 
अनुवाद
ब्रह्मा और शिव को एहसास हुआ कि वह कृष्ण के प्रेम में लीन थे, इसलिए उन्होंने उनके कान में मंत्रोच्चार किया।
 
Brahma and Shiva realized that he was absorbed in love with Krishna, so they chanted mantras into his ears.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)