श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 14: यमराज का संकीर्तन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.14.28 
কেহ কেহ না জানযে আনন্দ-কীর্তন
কারুণ্য দেখিযা কেহ করযে ক্রন্দন
केह केह ना जानये आनन्द-कीर्तन
कारुण्य देखिया केह करये क्रन्दन
 
 
अनुवाद
उनमें से कुछ ने कभी भी ऐसे आनंदमय कीर्तन का अनुभव नहीं किया था, और कुछ ऐसी करुणा देखकर रो पड़े।
 
Some of them had never experienced such blissful kirtan, and some wept at the sight of such compassion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)