श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 14: यमराज का संकीर्तन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.14.10 
চিত্রগুপ্ত-স্থানে জিজ্ঞাসযে প্রভু যম
“কিবা এ দুঽযের পাপ, কিবা উপশম”
चित्रगुप्त-स्थाने जिज्ञासये प्रभु यम
“किबा ए दुऽयेर पाप, किबा उपशम”
 
 
अनुवाद
भगवान यमराज ने चित्रगुप्त से पूछा, "उन दोनों ने कितने पाप किए थे और उन पापों का निवारण क्या था?"
 
Lord Yamaraja asked Chitragupta, "How many sins did both of them commit and what was the solution to those sins?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)