श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 13: जगाई और माधाई का उद्धार  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  2.13.71 
হরিদাস প্রভু বলে,—“শুন মহাশয
তোমার যে ইচ্ছা, সেই প্রভুর নিশ্চয
हरिदास प्रभु बले,—“शुन महाशय
तोमार ये इच्छा, सेइ प्रभुर निश्चय
 
 
अनुवाद
हरिदास प्रभु ने कहा, “हे महाशय, सुनो, तुम्हारी इच्छा ही भगवान की इच्छा है।
 
Haridas Prabhu said, “O Sir, listen, your wish is the wish of God.
तात्पर्य
हरिदास ने नित्यानंद प्रभु से कहा, "तुम्हारी जो भी इच्छा है, श्री गौरसुंदर उसे पूर्ण रूप से स्वीकार करते हैं।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)