श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 13: जगाई और माधाई का उद्धार  »  श्लोक 66-67
 
 
श्लोक  2.13.66-67 
যদি তুমি শুভানুসন্ধান কর মনে
তবে সে উদ্ধার পায এই দুই-জনে
তোমার সঙ্কল্প প্রভু না করে অন্যথা
আপনে কহিলা প্রভু এই তত্ত্ব-কথা
यदि तुमि शुभानुसन्धान कर मने
तबे से उद्धार पाय एइ दुइ-जने
तोमार सङ्कल्प प्रभु ना करे अन्यथा
आपने कहिला प्रभु एइ तत्त्व-कथा
 
 
अनुवाद
"यदि तुम इन दोनों के कल्याण के बारे में सोचोगे, तो इनका उद्धार अवश्य होगा। प्रभु तुम्हारी इच्छा पूरी करने में कभी भी लापरवाही नहीं बरतते। यह सत्य प्रभु ने स्वयं प्रकट किया था।"
 
"If you think about the welfare of these two, they will surely be saved. The Lord never neglects to fulfill your wishes. This truth was revealed by the Lord Himself."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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