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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 13: जगाई और माधाई का उद्धार
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श्लोक 46
श्लोक
2.13.46
লোক-স্থানে নিত্যানন্দ জিজ্ঞাসে আপনে
“কোন্ জাতি দুই জন, হেন মতি কেনে?”
लोक-स्थाने नित्यानन्द जिज्ञासे आपने
“कोन् जाति दुइ जन, हेन मति केने?”
अनुवाद
नित्यानंद ने कुछ लोगों से व्यक्तिगत रूप से पूछा, "ये दोनों किस जाति के हैं? ये ऐसा व्यवहार क्यों करते हैं?"
Nityananda asked some people individually, "What caste do these two belong to? Why do they behave like this?"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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