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श्लोक 2.13.400  |
চৈতন্য-কথার আদি অন্ত্য নাহি জানি
যে-তে-মতে চৈতন্যের যশঃ সে বাখানি |
चैतन्य-कथार आदि अन्त्य नाहि जानि
ये-ते-मते चैतन्येर यशः से वाखानि |
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| अनुवाद |
| भगवान चैतन्य से संबंधित विषयों का न तो कोई आरंभ है और न ही अंत, फिर भी किसी न किसी तरह मैं उनकी महिमा का वर्णन कर रहा हूँ। |
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| There is neither a beginning nor an end to the topics related to Lord Chaitanya, yet somehow or the other I am describing His glories. |
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