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श्लोक 2.13.399  |
আমার প্রভুর প্রভু গৌরাঙ্গ-সুন্দর
যথা বৈসে তথা যেন হঙ অনুচর |
आमार प्रभुर प्रभु गौराङ्ग-सुन्दर
यथा वैसे तथा येन हङ अनुचर |
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| अनुवाद |
| मैं अपने प्रभु के स्वामी श्री गौरसुन्दर का सेवक बनकर रहूँ, चाहे वे जहाँ भी हों। |
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| May I remain a servant of my Lord's master, Sri Gaurasundara, wherever he may be. |
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