श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 13: जगाई और माधाई का उद्धार  »  श्लोक 396
 
 
श्लोक  2.13.396 
সহস্র করুণা-সিন্ধু মহা-কৃপাময
দোষ নাহি দেখে প্রভু—গুণ-মাত্র লয
सहस्र करुणा-सिन्धु महा-कृपामय
दोष नाहि देखे प्रभु—गुण-मात्र लय
 
 
अनुवाद
भगवान की परम दया हजारों सागरों के समान विशाल है। वे दूसरों के गुणों को देखते हैं और उनमें कभी दोष नहीं निकालते।
 
The Lord's supreme mercy is as vast as a thousand oceans. He sees the virtues of others and never finds fault with them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)