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श्लोक 2.13.343  |
দুই চক্ষু অদ্বৈত মেলিতে নাহি পারে
মহা-ক্রোধাবেশে প্রভু গালাগালি পাডে |
दुइ चक्षु अद्वैत मेलिते नाहि पारे
महा-क्रोधावेशे प्रभु गालागालि पाडे |
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| अनुवाद |
| अद्वैत उनकी आंखें नहीं खोल सका, इसलिए बहुत क्रोधित होकर उन्होंने नित्यानंद को गाली दी। |
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| Advaita could not open his eyes, so becoming very angry he abused Nityananda. |
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