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श्लोक 2.13.289  |
তোমার অচিন্ত্য শক্তি কে বুঝিতে পারে?
যখন যে-রূপে কৃপা করহ যাহারে” |
तोमार अचिन्त्य शक्ति के बुझिते पारे?
यखन ये-रूपे कृपा करह याहारे” |
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| अनुवाद |
| "आपकी अकल्पनीय शक्तियों को कौन समझ सकता है या आप कब, कैसे और किस पर अपनी दया बरसाते हैं?" |
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| "Who can understand your unimaginable powers or when, how, and on whom you bestow your mercy?" |
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