श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 13: जगाई और माधाई का उद्धार  »  श्लोक 289
 
 
श्लोक  2.13.289 
তোমার অচিন্ত্য শক্তি কে বুঝিতে পারে?
যখন যে-রূপে কৃপা করহ যাহারে”
तोमार अचिन्त्य शक्ति के बुझिते पारे?
यखन ये-रूपे कृपा करह याहारे”
 
 
अनुवाद
"आपकी अकल्पनीय शक्तियों को कौन समझ सकता है या आप कब, कैसे और किस पर अपनी दया बरसाते हैं?"
 
"Who can understand your unimaginable powers or when, how, and on whom you bestow your mercy?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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