श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 13: जगाई और माधाई का उद्धार  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.13.28 
এ-মত প্রকট কেনে করিবে সুজনে?
আর বার আসে যদি লৈব দেযানে”
ए-मत प्रकट केने करिबे सुजने?
आर बार आसे यदि लैब देयाने”
 
 
अनुवाद
"सुजन ऐसा क्यों करेगा? अगर वे दोबारा आए तो हम उन्हें राजा के पास ले जाएँगे।"
 
"Why would Sujan do that? If they come again, we'll take them to the king."
तात्पर्य
देयाने शब्द (फारसी शब्द दीवान से लिया गया) का अर्थ है "शाही सभा", "धार्मिक बोर्ड", "अदालत", "न्याय का घर" या "दरबार।"

"अगर वे अच्छे लोग होते तो वे घर-घर जाकर बेकार की बातें क्यों करते? अगर वे फिर आएँगे तो हम उन्हें गिरफ़्तार करवा कर धार्मिक बोर्ड भेज देंगे।"

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)