श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 13: जगाई और माधाई का उद्धार  »  श्लोक 262
 
 
श्लोक  2.13.262 
সত্য কহি,—আমি কিছু স্তুতি নাহি করি
উচিতেই অজামিল মুক্তি-অধিকারী
सत्य कहि,—आमि किछु स्तुति नाहि करि
उचितेइ अजामिल मुक्ति-अधिकारी
 
 
अनुवाद
"हम आपकी चापलूसी नहीं कर रहे, हम सच कह रहे हैं। अजामिल वास्तव में मुक्ति के योग्य था।"
 
"We are not flattering you, we are telling the truth. Ajamila was indeed worthy of salvation."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)