অনন্তের ভাবে প্রভু ভাসেন গঙ্গায
না বুঝিযা সর্ব-লোক করে—ঽহায হাযঽ
अनन्तेर भावे प्रभु भासेन गङ्गाय
ना बुझिया सर्व-लोक करे—ऽहाय हायऽ
अनुवाद
नित्यानंद अनंत भाव से गंगा में तैर रहे थे। उनकी महिमा को न समझ पाने पर सभी विलाप करने लगे, "हाय! हाय!"
Nityananda was floating in the Ganges in an infinite trance. Unable to comprehend his glory, everyone began to lament, "Alas! Alas!"
तात्पर्य
भगवान अनन्त शेषनाग सर्वदा करण समुद्र में विश्राम करते हैं। इसी भाव से नित्यानंद गंगा में तैर कर प्रकट हुए। जो लोग उनके गुणों को नहीं जानते थे वे चिन्तित हो गए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥