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श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 12: नित्यानंद प्रभु की महिमा
»
श्लोक 63
श्लोक
2.12.63
শ্রী কৃষ্ণ-চৈতন্য নিত্যানন্দ-চান্দ জান
বৃন্দাবন-দাস তছু পদ-যুগে গান
श्री कृष्ण-चैतन्य नित्यानन्द-चान्द जान
वृन्दावन-दास तछु पद-युगे गान
अनुवाद
मैं वृन्दावनदास, श्री चैतन्य और नित्यानंद प्रभु को अपना जीवन और आत्मा मानकर, उनके चरणकमलों की महिमा का गान करता हूँ।
I consider Vrindavandas, Sri Chaitanya and Nityananda Prabhu as my life and soul and sing the glories of their lotus feet.
इस प्रकार श्री चैतन्य-भागवत, मध्य-खण्ड, अध्याय बारह - "नित्यानंद प्रभु की महिमा" समाप्त होता है ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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