श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 12: नित्यानंद प्रभु की महिमा  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.12.5 
স্বানুভাবানন্দে ক্ষণে করেন হুঙ্কার
শুনিলে অপূর্ব বুদ্ধি জন্মযে সবার
स्वानुभावानन्दे क्षणे करेन हुङ्कार
शुनिले अपूर्व बुद्धि जन्मये सबार
 
 
अनुवाद
कभी-कभी वे अपने आनंद में ऊँचे स्वर में गर्जना करते थे। उनकी गर्जना सुनकर सभी आश्चर्यचकित हो जाते थे।
 
Sometimes he would roar loudly in his joy. Everyone was astonished to hear his roar.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas