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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 12: नित्यानंद प्रभु की महिमा
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श्लोक 41
श्लोक
2.12.41
কি সে নিত্যানন্দ পাদোদকের প্রভাব
পান-মাত্র সবে হৈলা চঞ্চল-স্বভাব
कि से नित्यानन्द पादोदकेर प्रभाव
पान-मात्र सबे हैला चञ्चल-स्वभाव
अनुवाद
नित्यानंद के चरणों को धोने वाले जल का कितना अद्भुत प्रभाव है, क्योंकि उस जल को पीने मात्र से ही सभी लोग व्याकुल हो गए।
What a wonderful effect the water that washed Nityananda's feet had, because just by drinking that water everyone became restless.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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